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17 साल के एक लड़के को एक भाई साहब काम के लिए मुंबई लेकर आते हैं वह लड़का मुंबई के बांद्रा स्टेशन पर उन भाई साहब से कहीं अलग हो जाते हैं वह उनको बहुत ढूंढता है लेकिन वे नहीं मिलते उसके पास घर पर वापस जाने के लिए भी पैसे नहीं होते
उसको हिंदी भी नहीं आती मुंबई उसको कोई नहीं जानता वह क्या करेगा किस से मिलेगा कहां जाएगा कुछ नहीं जानता आगे चल के वह लड़का करोड़ों की कंपनी का मालिक बनता है कैसे आइए जानते हैं
कहानी है प्रेम गणपति की जिन का जन्म नवलपुरम तमिलनाडु में हुआ उनके पिताजी एक किसान है तो घर की कमाई कुछ खास नहीं थी ठीक-ठाक सी थी
उनके आसपास यह माहौल था की आठवीं या तो फिर दसवीं आते आते बच्चे काम धंधे पर लग जाते हैं किसी दुकान में होटल में कहीं पर भी नौकरी पर लग जाते हैं तो प्रेम भी एक जगह पर चाय की दुकान पर नौकरी पर लग गए
उसके बाद उसने एक दो नौकरी चेंज भी की अब जहां पर वह काम करता था वहां पर उसकी मुलाकात हुई एक भाई से जो
मुंबई से आए थे प्रेम आगे बढ़ने के लिए मुंबई जाना चाहता था तो यह भाई साहब उसको अपने साथ ले गए मुंबई
उस वक्त प्रेम की एज थी 17 साल प्रेम जाते जाते यह सोच रहा था कि मैं मुंबई जा कर यह करूंगा वह करूंगा बहुत खुश था बच्चा मुंबई पहुंचते ही हालात ने बहुत ही बड़ा झटका दे दिया मुंबई के बांद्रा स्टेशन पर उस भाई साहब से अलग हो गया जो उसको लेकर आए थे
बेचारे को हिंदी भी नहीं आती थी बहुत डर गया वह स्टेशन की भीड़ भाढ़ देखकर उस शहर की रफ्तार देख के उसने स्टेशन पर सब से पूछा उनको बहुत ढूंढने की कोशिश की लेकिन वह कहीं पर मिले नहीं
पैसे भी नहीं थे कि घर पर वापिस आ जाए और उसको मुंबई में कोई जानता भी नहीं था क्या सोच कर आए थे और क्या हो गया हम सबकी लाइफ में भी ऐसा होता है ना कि हम कुछ सोचते हैं क्यों यह करूंगा ऐसे करूंगा ऐसे हो जाएगा
लेकिन जैसे हमने सोचा है वैसा ही हो यह जरूरी नहीं है ऐसे टाइम पर ना हमारे पास दो चौइस होते हैं क्या होगा कैसे होगा यह सोच कर रोते रहे और दूसरा ऑप्शन तो क्या हो गया मैं तो नहीं रुकूंगा अरे ऐसे नहीं तो वैसे मैं तो नहीं रुकूंगा
इन दोनों में से ज्यादातर लोग क्यों चुश करते हैं पहले वाला ऑप्शन चलो छोड़ो यह सब बातें आगे बढ़ते हैं प्रेम गणपति की कहानी पर स्टेशन पर प्रेम की एक तमिल भाई साहब से मुलाकात हुई जो तमिल बोलते थे
उसने मदद मांगी की मेरे साथ ऐसा ऐसा हुआ है मुझे ठीक से हिंदी नहीं आती किसी को जानता नहीं हूं घर जाने के लिए पैसे भी नहीं है तो वह बोला आदमी प्रेम को एक मंदिर के पास लेकर गया
उसने उसको शांत किया हिम्मत दी और कहां कि तुम चिंता मत करो मैं तुम्हारा रिटर्न टिकट करवा देता हूं तुम घर पहुंच जाओगे सब ठीक हो जाएगा टेंशन मत लो पहले तो प्रेम को यह सुन के बड़ा अच्छा लगा कि शुक्र है मैं घर तो पहुंच जाऊंगा
लेकिन फिर उसने सोचा कि इसमें खुश होने वाली क्या बात है मैं घर से ही आया हूं किस लिए आया हूं वापस जाने के लिए हां जैसा सोचा था वैसा नहीं हुआ लेकिन तो क्या हुआ जो बंदा मुझे यहां लेकर आया था सिर्फ वही मुझे काम दिलवा सकता है ऐसा किसने कहा है
वह होगा तभी मैं आगे बढूंगा ऐसा किसने कहा है उसके लिए थोड़ी आया हूं मैं मुंबई मैं तो मेरे लिए आया हूं मेरे सपनों के लिए आया हूं तो उसकी होने ना होने से क्या फर्क पड़ता है हां थोड़ा सा फर्क पड़ता है की काम ढूंढने में थोड़ी सी तकलीफ होगी शुरू शुरू में
लेकिन तो क्या हो गया देख लेंगे कर लेंगे रास्ते में छोटा सा खंडा आ जाता है तो हम पीछे नहीं मुड़ जाते आगे बढ़ते रहते हैं उसने उस भाई साहब से कहां की मैं यहीं पर रहूंगा काम करूंगा धन्यवाद
उसने आसपास देखा मोर सोचा कि मैं यहां पर काम कैसे ढूंढ सकता हूं मुझे काम कैसे मिल सकता है रेस्टोरेंट्स सॉक्स सब जगह पर जाकर उसने पूछना शुरू कर दिया क्या मुझे आपके यहां पर काम मिल सकता है
पहले तो सोने से यही जवाब मिला ना नहीं मिलेगा आगे जाओ वगैरा-वगैरा लेकिन लॉस्ट एक जवाब मिला एक बैकरी शॉप मैं बर्तन धोने का काम मिला वैसे प्रेम के एक्सपीरियंस टैलेंट और नॉलेज के हिसाब से यह काम उसके लिए ठीक नहीं था
लेकिन फिर जैसा आप सोचो वैसे ही हो यह जरूरी नहीं है और शुरू शुरू में जब तक हालात ठीक नहीं हो जाते उसके लिए यह काम जरूरी था तू उसने वो काम कर लिया सीख लिया आगे चलके उसने जॉब चेंज कर दी
एक चाय की दुकान में काम किया वेटर का अब यहां पर उसने कस्टमर के साथ रिलेशन कैसे बनाते हैं यह सीखा कैसे उनको खुश रखते हैं वहां सबसे ज्यादा टिप प्रेम को मिलती थी और प्रेम को कस्टमर ढूंढते थे वह लड़का कहां है
उसको बुलाओ क्योंकि प्रेम कस्टमर को समझता था जानने लगा था की किसको क्या अच्छा लगता है इसको क्या अच्छा नहीं लगता उन्हीं कस्टमरस मैं से एक कस्टमर ने प्रेम को ऑफर दी की हम लोग पार्टनर शिप मैं एक टी स्टॉल खोलते हैं
प्रेम ने हां कहां बिजनेस की शुरुआत हो गई धंधा चलने लगा लेकिन जैसे जैसे पैसे आने लगे उसके पार्टनर ने सोचा कि मैं प्रेम को पैसा क्यों दूं तो उसने अपना मन बदल लिया और प्रेम को निकाल दिया
पार्टनरशिप तोड़ दी और उसकी जगह पर किसी को सैलरी पर रख लिया फिर से बड़ा झटका बिजनेस शुरू होती ही पाटनर ने धक्का मार दिया था फिर से वापिस जहां से आए थे वहीं पर आ गए फिर से वही काम ढूंढने वाला सिस्टम
प्रेम ने सोचा कि तो क्या हो गया यहां भी कुछ सीखा के जब तुम तुम्हारे टैलेंट से किसी और का बिजनेस चला सकते हो तो खुद का बिजनेस क्यों नहीं चलेगा शुक्रिया पार्टनर जिसने यकीन दिलाया कि मेरे में इतना दम तो है कि मैं बिजनेस चला सकता हूं
उस के पास हजार रुपए थे उस वक्त सेविंग के सोचा कि मैं सबसे बेस्ट क्या कर सकता हूं फिर क्या उसने हजार रुपए इन्वेस्ट कर दिए एक इडली डोसा का छोटा सा ठेला लगा दिया मुंबई के वासी में
धीरे-धीरे बिजनेस आगे बढ़ रहा था प्रेम इतना अच्छा इतना टेस्टी डोसा बनाता था कि लोग ढूंढते ढूंढते आते थे लोग उसको जानने लगे भीड़ होने लगी पैसा आने लगा लेकिन फिर मुंशी पार्टी वालों ने परेशान करना शुरू कर दिया था
अब जरूरत थी एक फिक्स जगह की एक रेस्टोरेंट की जहां पर यह सारा झंमेला ना हो उन्होंने एक जगह रेंट पर लि नाम लिया प्रेम गणपति साउथ इंडियन फास्ट फूड बाद में इसे चेंज करके फिर दोसा प्लाजा करो दिया गया
अब उन्होंने सोचा कि कस्टमर इतना पसंद करते हैं मेरी रेसिपी को तो मेरा भी फर्ज बनता है कि मैं उनको बेहतर दू तो यहां पर धंदा अच्छे से चल रहा था कोई जरूरत नहीं थी उनको कुछ सोचने की
लेकिन फिर भी उन्होंने सोचा और आगे क्या हो सकता है डोसा के अंदर और क्या हो सकता है अलग-अलग एक्सपेरिमेंट करना शुरू कर दिया अलग अलग कॉन्बिनेशन बनाना शुरु कर दिया
डोसा के अंदर पनीर नूडल्स मंचूरियन चटनी अलग-अलग ट्राई किए बहुत एक्सपेरिमेंट उन्होंने किए और उन्होंने 27 वैराइटीज बनाए जिसे कोई एक बार खा ले तो वापिस ढूंढता हुआ आ जाए
अब यह भाई साहब उनकी वैराइटीज की वजह से फेमस होने लगे थे बिजनेस और तेजी से चल पड़ा फिर किसी ने कहां की भाई यहां पर एक नया मॉल ओपन हुआ है सेंटर एक करके अगर आप अपने बिजनेस को वहां पर लेकर जाएंगे तो फायदा हो सकता है
उस वक्त पे प्रेम के लिए यह थोड़ा महंगा स्टैंप था लेकिन अब आगे बढ़ना था तो रिक्स तो लेना ही पड़ेगा और उन्होंने रिक्स लिया वहां पर भी अपना मैजिक दिखा दिया इनका नाम अब दूर दूर तक जाने लगा था
फ्रेंचाइजी के लिए चैन को आगे बढ़ाने के लिए अब कॉल आने लगे थे लोग उनसे जुड़ना चाहते थे धीरे-धीरे करके टीम बड़ी होती गई स्टाफ बड़ा होता गया वैराइटीज बढ़ती गई इनकम बढ़ती गई बिजनेस बढ़ता गया
प्रेम जी ने कुकिंग के साथ-साथ ब्रांडिंग के ऊपर भी उतना ही फोकस किया था वेबसाइट लोगो एडवरटाइजमेंट वगैरा अब ऐसा वक्त आ गया था डोसा प्लाजा का टर्नओवर करोड़ों में पहुंचने लगा था पहले 5 सालों में उन्होंने 26 आउटलेट्स ओपन कर दिए थे
रिस्पांस बहुत ही तगड़ा मिला था इंडिया में तो फैल गया था आगे चल के बिज़नस इंडिया से बाहर भी शुरू हो गया ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड आबू धाबी सिंगापुर ऑल का दोसा प्लाजा पूरी दुनिया में है
और वह लड़का जिसके पास घर वापस जाने के लिए भी पैसे नहीं थे वह करोड़ों की कंपनी का मालिक है हजारों लोग जींस में काम करते हैं हजारों लोगों का परिवार चलता है लाखों कस्टमर जुड़े हुए हैं नए जुड़ रहे हैं
अगर उस दिन हुआ लड़का वापिस चला जाता तो आज वो कहां होता तो क्या सीखे हम इस कहानी से मेहनत करते रहो चलते रहो जो लोग आज तुम्हें पागल कह रहे हैं वही लोग कल तुम्हें सर कहेंगे
जो लोग तुम्हारे आईडिया का मजाक उड़ाते हैं वही लोग कल तुम्हारे आइडिया को सेल्यूट करेंगे यह सब कुछ मुमकिन है लगन से यह जो शब्द है ना लगन किसी के भी सपने पूरे करने की ताकत रखता है
किस्मत के भरोसे पर मत बैठो अगर आज भी तुम किस्मत के भरोसे पर बैठे हो तो तुम भी उन करोड़ों लोगों में से हो जो यह गलती कर रहे हैं तो बहाने बनाना बंद करो बहन से खुद को बचाना बंद करो पहले तो
कुछ पल के लिए यह बहाने तुमको सुकून दे सकते हैं खुश रख सकते हैं लेकिन आगे चल के तुम्हारा किसी भी बहाने से निकल गए भक्तों को वापस नहीं ला पाओगे क्या नहीं कर सकते इस पर फोकस मत करो क्या कर सकते हो यह देखो
99 परसेंट लोगों का प्रॉब्लम यह है कि उनको यह दिखता है यही याद रहता है कि वह क्या नहीं कर सकते हैं एक परसेंट लोग यह देखते हैं कि वह क्या कर सकते हैं उस 1% में आने की कोशिश करो
तो आज की कहानी खत्म होती है अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी हो तो प्लीज कमेंट करके जरूर बताना और सब्सक्राइब जरूर करना प्लीज थैंक यू बाय फिर मिलेंगे अगली कहानी में
कैसे एक 17 साल का लड़का खड़ी करता है करोड़ों की कंपनी डोसा प्लाजा
Reviewed by Shubham Thakur
on
अप्रैल 02, 2020
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अप्रैल 02, 2020
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