कैसे एक कूड़ा उठाने वाला बना वर्ल्ड फेमस फोटोग्राफर पूरी कहानी पढ़िए हिंदी में



विकी जो कभी रेलवे स्टेशन पर कचरा उठाता था आज वह  इंटरनेशनल फोटोग्राफर है पूरी दुनिया उसे जानती है कैसे विकी जो कभी ट्रेन में बचा हुआ खाना खाकर अपना पेट भरता था उस विकी को बकिंघम पैलेस मैं प्रिंस के साथ लंच के लिए इनवाइट किया जाता है

क्यों विकी जो कभी कचरे के ढेर में सोता था घर बैठे गार वेज गोडाउन में सोता था आज वह पूरी दुनिया घूम रहा हैफाइव स्टार होटल्स में रहता है कैसे आइए जानते हैं एक ऐसे लड़के की कहानी जिसने अपने काम से अपनी मेहनत से खुद खुदा को भी खुश कर दिया है

शुरू  करते  हैं  आज  की  बात  विकी  एक  गरीब परिवार से बिलॉन्ग करता था उसके पापा दिन का 15 से  ₹20 कमाते थे अब  इतने  पैसों  में तो   घर.  क्या चलेगा और बच्चों की क्या परवरिश होगी समझ सकते हैं लेकिन वह चाहते थे कि  विकी 10th class तक पढ़ाई करें

 वैसे यह कोई बड़ी बात नहीं है कोई बड़ा टारगेट नहीं था बट उनके लिए बहुत बड़ी बात थी तो विकी जब ढाई 3 साल का था तो उसे  नाना  नानी  के  यहां  पर रख दिया गया वहां पर फाइनेंसियल कंडीशन थोड़ी  अच्छी सी थी

तो सोचा कि यहां पर वह अच्छे से पढ़ाई करेगा कुछ आगे बढ़ेगा अपनी लाइफ में यह सोच के लेकिन अब यहां पर तो कुछ उल्टा  ही हो रहा था विकी को छोटी-छोटी बातों पर मारा जाता था बहुत पिटाई होती थी बहुत ज्यादा रेस्टेशन थे

बच्चे को कहीं बाहर आजा नहीं  सकते हैं तो विक्की  का यहां पर दम घुट रहा था लेकिन क्या कर सकते थे वापस तो नहीं  जा सकते मां बाप के पास और जाकर क्या करेंगे ऊपर से उनका टेंशन बढ़ जाता तो वहां पर जाने का कोई ऑप्शन तो था ही नहीं

तब ऐसे में कई साल तक वह  सहन करता रहा लेकिन जब ऐसा वक्त आ गया कि अब सहन नहीं हो रहा है तो उसने सोचा कि मैं घर से भाग जाता हूं कहां जाऊंगा क्या करूंगा आगे क्या होगा लाइफ में कुछ नहीं सोचा

क्योंकि उस वक्त पे इन सबसे बड़ा सवाल ये था कि इस घुटन वाली जिंदगी से छुटकारा कैसे पाएं बस फिर किया एक दिन सही मौका देख कर मामा के वॉलेट से कुछ पैसे चुराए हजार रुपे के करीब और लड़का भाग गया घर से

सीधा गया स्टेशन वहां पर दिल्ली की ट्रेन लगी हुई थी तो बिना कुछ सोचे समझे बैठ गया पहुंच गया दिल्ली तब उसकी एज थी 11 साल लाइफ में पहली बार किसी बड़े सिटी में आया था बहुत ज्यादा डरा हुआ था जब स्टेशन से बाहर निकला तो

शहर की रफ्तार देखकर और ज्यादा डर गया भाग के वापस स्टेशन में आ गया और रोते-रोते इधर उधर भटक रहा था समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करें कहां जाएं बाकी बच्चों को अपने मां-बाप के साथ  फोटो गाना नए-नए अच्छे-अच्छे कपड़े पहने हुए मस्ती करते हुए

देख रहा था सोच रहा था कि यह लोग कितने नसीब वाले हैं तभी कचरा उठाने वाले कुछ बच्चे उसके पास आए उन्होंने देखा की यह रो क्यों रहा है उन्होंने पूछा की तू घर से भाग के आया है क्या विकी ने रोते-रोते कहा कि हां मैं घर से भाग कर आया हूं

वह बच्चे विकी की हालत को समझते थे क्यों यह आप समझ गए होंगे बच्चों ने कहा कि तू टेंशन मत ले एक जगह पर तुझे लेकर जाएंगे सब ठीक हो जाएगा विकी वैसे किसी को जानता नहीं था इनको भी नहीं जानता था लेकिन भरोसा करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था

वह बच्चे विकी को एक शेल्टर होम लेकर गए जिसका नाम था सलाम बालक 1988 में मीरा नायर की एक फिल्म आई थी शायद आपको पता होगा सलाम बॉम्बे करके उस फिल्म के प्रीमियर से जो पैसे आए थे उससे यह ट्रस्ट बनाया गया था

सलाम बालक बच्चों के लिए विकी ने वहां जाकर देखा कि यहां पर तो सब को लॉक करके रखते हैं यार तो वहां से भी वो कैसे भी करके भाग गया वापिस आ गया स्टेशन पर फिर से वो बच्चे मिले कचरा उठाने वाले विकी ने कहा कि वहां पर तो ऐसे ऐसे होता है बच्चों को लॉक करके रखते हैं

सब ने कहा चल ठीक है हमारे साथ काम करेगा विक्की ने कहा कि हां हां करूंगा क्यों नहीं करूंगा उसके बाद विकी उनके साथ काम करने लगा स्टेशन पर बोतल उठाना इकट्ठा करना फिर स्टेशन से ही कूलर का पानी भरकर जनरल बोगी में बेच देना

कचरा उठाना कबाड़ी में बेच देना यह सब काम था इस स्ट्रगल के  साथ-साथ  और  भी  कई  सारी  मुसीबतें  थी  जैसे  कि प्लेटफार्म  पर  हर  एक  प्लेटफार्म पर  एक  दादा  होता था जिसकी अंडर में सबको काम करना पड़ता था

पैसे सारे उसको देने पड़ते थे और वह बदले मैं खाना और प्रोटेक्शन देता था प्रोडक्शन किससे बाकी प्लेटफार्मस के दादा से ताकि कोई इनको परेशान ना करें सिर्फ बोलना होता था की  हम  इस के अंडर में काम कर रहे हैं

पुलिस भी कभी-कभी बहुत मारती थी भागआती थी वहां से पैसेंजर का खास करके जब कुछ चोरी हो जाए करता था तो इन लोगों पे शक किया जाता था बहुत पिटाई होती थी पूछताछ होती थी सुबह-सुबह जब राजधानी एक्सप्रेस आती थी तो यह लोग किचन में घुस जाते थे

अगर किचन वाले अच्छे हुए तो बचा हुआ खाना मिल जाता था कभी-कभी अच्छा खाना भी मिल जाता था भले ही किसी और का हो कभी-कभी आइसक्रीम वगैरा मिल जाता था तो बाहर जाकर उसको भी भेज दिया जाता था

थोड़ा सा पैसा इकट्ठा करने का जुगाड़ यहां से होता था सोने के लिए इन्होंने कचरे का ढेर ढूंढा था यहां पर सब कचरा गोडाउन जैसा कुछ था वहां पर कोई उठाने आता नहीं भगाने आता नहीं था तो देर तक सोने को मिल जाता था

वॉशिंग लाइन में नहाना वहीं पर अपने कपड़े धो कर थोड़ा बहुत सुखा के फिर उन्हीं को दोबारा से पहन के वापस निकल जाओ बोतल इकट्ठा करने के लिए तो यह उसकी जिंदगी थी अब विकी को घूमने फिरने का बहुत शौक था

इसीलिए घर से भागे भी थे क्योंकि आजादी से घूमना उसे अच्छा लगता था तो दिल्ली में आए हुए 5 से 6 महीने हो गए थे अभी तक भाई ने कुतुबमीनार नहीं देखा था इंडिया गेट नई देखा था तो थोड़ा सा अफसोस था

तो उसने एक और रिस्क लिया जिंदगी में स्टेशन की लाइफ छोड़ के वहां स्टेशन के पास में एक होटल थी अजमेरी गेट के नजदीक तो भाई ने वहां जाकर काम मांगा कहा कि मुझे काम की जरूरत है काम मिल भी गया और काम था बर्तन धोने का

 विकी ने वैसे कभी लाइफ में बर्तन धोए नहीं थे लेकिन उसने सीख लिया बर्तन धोना शुरु कर दिया रात को 12:00 बजे तक बर्तन धोना पड़ता था सुबह 5:00 बजे उठकर वापस लग जाओ वह भी ठंडे पानी में बर्तन धो धो के कभी बीमार भी पड़ते थे

कभी  कुछ  चोट  बोट लग  जाती  थी  खून भी निकलता था लेकिन जिंदगी ने बोला था कि रुकना मना है भाई बस चलते रह काम करना ही पड़ेगा वहां एक दिन एक पढ़ा लिखा इंसान आया और उसने कहा कि तुम यह सब क्या कर रहे हो तुम्हारी उम्र पढ़ाई की है तुम यह काम क्यों कर रहे हो


विकी ने कहा कि शहर मेरे को कौन पढ़ाएगा मैं यहीं पर ठीक हूं उसने कहा कि नहीं नहीं तुम चलो मैं तुम्हें एक जगह लेकर  चलता हूं सलाम बालक का ही एक दूसरा शेल्टर होम था अपना घर कह के वहां पर उसको लेकर गए वहां पर सब स्कूल के बच्चे रहते थे स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे वहां पर रहते थे

तो वहां पर इसका स्कूल बॉलिंग शुरू हो गया अच्छे नंबर्स भी आने लगे एटी परसेंट के आसपास पढ़ाई बढ़ई सब ठीक चल रही थी लेकिन टेंथ में पता नहीं क्या हुआ 48 परसेंट आ गए
तो वहां से बोला गया कि तुम यह पढ़ाई बड़ाई छोड़ो और कोई फॉर्मल कोर्स कर लो

कुछ जो भी तुमको इंटरेस्ट हो विकी को याद आया कि जब शुरू शुरू  में  वह  सलाम  बालक  में आया  था  तो  एक फोटोग्राफी का वर्कशॉप हुआ था और उसने  पार्टिसिपेट  तो नहीं किया था लेकिन जिन लोगों ने पार्टिसिपेट किया था

उसमें से जिनकी फोटोग्राफी सबसे अच्छी थी उनको श्रीलंका और इंडोनेशिया ले जाया गया था तो यह थोड़ा सा था कि यार मैं फोटोग्राफी करूंगा तो मुझे घूमना फिरना मिलेगा ऐसे अलग-अलग कंट्री में

यह घूमने के पैशन की वजह से भाई ने फोटोग्राफी का लाइन सिलेक्ट कर लिया बोला कि सर मैं फोटोग्राफर बनना चाहता हूं उसके बाद सर ने पुराना पड़ा हुआ कूड़े का कैमरा kb10 दे दिया कि लो करो फोटोग्राफी

फोटोग्राफी का शौक है तो तो विकी ने उस कैमरा से अपने करियर की दो शुरुआत की शेल्टर होम में जो नीचे बिछाने के लिए कारपेट दिया जाता है उसको दीवाल पर उसने टांग दिया और अपने दोस्तों के ही फोटोग्राफ्स खींचता था

तो ऐसे करके उसने काम की शुरुआत की कुछ वक्त के बाद वहां पर एक ब्रिटिश फोटोग्राफर आया सलाम बालक के बच्चों के ऊपर कुछ डॉक्यूमेंट्री वगैरह शूट करना था उसको तो सर ने बताया कि हमारे यहां पर एक लड़का है जिसको इस फील्ड में आगे जाना है

तो क्या आप उसे फोटोग्राफी और यह सब सिखाएंगे अगर आपको प्रॉब्लम ना हो तो उसने कहा कि क्यों नहीं सिखाएंगे भेज दो हम सिखाएंगे उसे सब कुछ विकी बहुत खुश हो गया
कि चलो मेरे को अब कुछ सीखने को मिलेगा प्रोफेशनली

लेकिन वह भाई साहब बोलते थे इंग्लिश में और विकी को इंग्लिश का ई भी नहीं आता था कुछ भी समझ में नहीं आता था लेकिन वह बस हां यस ओके या या या या करते रहता था
सब जगह उनके ड्राई पोर्ट वगैरह लेकर घूमता यह सब करता

लेकिन देखा उसने कि कैसे सूट होता है 18 साल का हुआ तो उसको सलाम बालक छोड़ना पड़ा क्योंकि 18 साल के बाद वहां पर रहना अलाउ नहीं है वो लोग सपोर्ट करते हैं वैसे जब तक आपकी जॉब ना लग जाए अगर आपको कुछ पढ़ाई भी करनी हो पूरा सपोर्ट करते हैं

बर्तन और जरूरी चीजें लेकर आप की विदाई करते हैं विकी की भी ऐसे ही विदाई हुई सलाम बालक ट्रस्ट ने ही विकी के लिए एक मेंटोर भी ढूंढ लिया था दिल्ली से ही था जिसका नाम था आलो ईमान अच्छे बड़े फोटोग्राफर थे बड़े-बड़े काम करते थे

विकी जब जाके उनसे मिला उन्होंने कहा कि ठीक है  कल से आ जाओ ₹3000 सैलरी रहेगी मोबाइल दूंगा और एक बाइक दूंगा महीने में 10 से 12 दिन काम रहेगा वैसे लेकिन 3 साल तक काम करना है कम से कम तभी रहना

विकी ने पूछा ऐसा क्यों तो उन्होंने कहा कि शुरू शुरू में लोग आते हैं फिर मैं उनको थोड़ा बहुत सिखाता हूं उनको लगता है कि मुझे सब कुछ आ गया है फिर आधे अधूरे नॉलेज के साथ चले जाते हैं अगर तुमको सही में इस फील्ड में कुछ सीखना है

तो कम से कम तीन साल रहोगे तो सारा नॉलेज गेन कर पाओगे ठीक से विकी ने सोचा की यार यह बंदा मुझे पैसे देगा
बाइक देगा मोबाइल देगा सब कुछ सिखाएगा भी सब जगह पर साथ में लेकर घूमेगा और क्या चाहिए मेरे को

उसके बाद विकी  की लाइफ मानो बदल गई वह अपने बॉस के साथ सब जगह पर जाने लगा उसके सपने पूरे होने लगे थे
घूमने के 2 साल में 300 से ज्यादा बोर्डिंग पास इकट्ठे कर लिए थे अलग-अलग देशों में घूमना फाइव स्टार होटल्स में रहना

 उसने कभी सपने में नहीं सोचा था जब वह कचरा उठाता था स्टेशन पर सोता था वह कचरे के ढेर में सोता था की ऐसी ऐसी जगह पर वह घूमेगा रहेगा विकी ने वहां से बहुत कुछ सीखा बहुत मेहनत भी करता था क्योंकि फोटोग्राफी ने उसकी जिंदगी बदली थी

इतना कुछ दे दिया था तो वह दिल लगाकर काम भी करता था कैसे बात करना है कैसे रहना है कैसे कपड़े पहने हैं हर छोटी-छोटी चीज अनए ने विकी को सिखाई कभी गलती भी होती थी तो सबके सामने वह बिकी को कुछ नहीं कहते थे साइड में  ले जाकर कहते थे

कि तुमने यह गलती की है नेक्स्ट टाइम थोड़ा सा ध्यान रखना तो कुल मिलाकर बिकी एक सॉलिड फोटोग्राफर बन गया था अब वक्त था कमाल करने का विकी ने 2007 में अपना पहला एग्जिबिशन लगाया जिसका नाम था स्ट्रीट ड्रीम्स

जो लोग फोटोग्राफी फील्ड से हैं उनको शायद मालूम होगा विकी ने अपनी पुरानी जो लाइफ थी स्टेशन वाली उस लाइफ को पोट्रे करने की कोशिश की उसके लिए कैमरा भी लोन पर लिया था और जॉब भी करता था और सारे पैसे वैसे मैनेज करने के लिए

वंदे   नया  होटल  में  वेटर  का  काम  भी  किया  साथ साथ एग्जीबिशन  हिट  हो  गया  तीन  बार   लंदन  में हुआ साउथ अफ्रीका में हुआ वियतनाम मैं भी इस को इनवाइट किया गया स्पॉन्सर भी मिलने लगे थे लोग तस्वीरें भी खरीदते थे पैसे वैसे भी आने लगे थे बैंक बैलेंस भी बढ़ने लगा था

 उसके   विकी  ने  एक  वर्ल्ड वाइड कंपटीशन में पार्टिसिपेट किया  इसमें  पूरी   दुनिया  से 5000 से ज्यादा एंट्री थी बेस्ट फोटोग्राफर की विकी इस कंपटीशन में दुनिया में टॉप फोर में आए थे उसके बाद वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की रिकंस्ट्रक्शन साइट की क्रिएटिव फोटोग्राफी के लिए विकी को चुना गया था

बहुत ही बड़ी बात है तो उसको न्यूयॉर्क बुलाया गया वहां उसकी फोटोग्राफी से वह लोग इतने इंटरेस्ट हुए कि उन्होंने विकी की आगे की पढ़ाई के लिए फोटोग्राफी में आगे की पढ़ाई के लिए आईपीसी में एडमिशन करने के लिए बहुत हेल्प की

आईबीएसई दुनिया के बेस्ट फोटोग्राफी के स्कूल में से एक है
सोचो जिस लड़के का स्कूलिंग का ठिकाना नहीं था कौन उसको पढ़ आएगा वो टेंशन था उसको कहां-कहां से मदद मिल रही थी और सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्यों मिल रही थी क्योंकि वह हर स्टेज पर अपने आप को प्रूफ करता था

दिल से काम करता था न्यूयॉर्क के बाद विकी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा है विकी आज इंटरनेशनल फोटोग्राफर है
बहुत ही फेमस है फोटोग्राफी के फील्ड में दुनिया में उसका नाम है बड़े-बड़े देशों में बड़ी-बड़ी कंपनियों के  बड़े बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए

विकी को इनवाइट किया जाता है विकी देश विदेश घूमता है जो उसका सपना था दुनिया देखने का घूमने फिरने का वह वह पूरा कर रहा है फाइव स्टार होटल्स में रहता है बहुत ही अच्छी लाइफ स्टाइल है

जब लोगों ने उसे देखा होगा कुछ सालों पहले बर्तन धोते हुए होटल के अंदर या तो फिर वह कचरा उठाते हुए बोरी को टांगे हुए किसी ने सोचा नहीं होगा यह लड़का यहां तक पहुंच सकता है तो क्या सीखे हम विकी रॉय की कहानी से हमको पूरा रास्ता तय करने की जरूरत नहीं है

और हम चाह कर भी पूरा रास्ता प्लान नहीं कर सकते कोई नहीं कर सकता है हम सिर्फ आज का काम कर सकते हैं और हमको आज के काम पर ही अपना फोकस करना है ईमानदारी से अपना काम करना है पैशन के साथ अपना काम करना है दिल लगाकर अपना काम करना है

तो आपको हमारी यह कहानी कैसी लगी कमेंट करके बताइएगा और प्लीज सब्सक्राइब जरूर कीजिएगा और अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर कीजिए धन्यवाद


कैसे एक कूड़ा उठाने वाला बना वर्ल्ड फेमस फोटोग्राफर पूरी कहानी पढ़िए हिंदी में कैसे एक कूड़ा उठाने वाला बना वर्ल्ड फेमस फोटोग्राफर पूरी कहानी पढ़िए हिंदी में Reviewed by Shubham Thakur on अप्रैल 04, 2020 Rating: 5

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